🏛️ कर्नाटक vs केंद्र: सीएम सिद्धारमैया की बड़ी मांग, मनरेगा और VB-GRAM-G को लेकर छिड़ी जंग
Political Clash: ग्रामीण विकास के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने केंद्र को घेरा
बेंगलुरु: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने ग्रामीण विकास नीतियों को लेकर एक बार फिर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। सीएम ने मनरेगा (MGNREGA) के प्रभावी कार्यान्वयन और मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्थाओं में बदलाव की मांग की है। सिद्धारमैया का तर्क है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए पुरानी व्यवस्थाओं को बहाल करना और राज्य के अधिकारों में हस्तक्षेप को रोकना अनिवार्य है।
- 1. मनरेगा (MGNREGA) के पूर्ण क्रियान्वयन की मांग
- 2. VB-GRAM-G व्यवस्था को समाप्त करने का दबाव
- 3. ग्रामीण श्रमिकों के लिए 150 दिनों के काम की वकालत
- 4. मजदूरी भुगतान में देरी पर केंद्र की आलोचना
- 5. राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता का मुद्दा
- 6. सूखे की स्थिति और ग्रामीण संकट पर चिंता
- 7. प्रशासनिक ढांचे में केंद्रीकरण का विरोध
- 8. ग्राम पंचायतों के अधिकारों की सुरक्षा
- 9. केंद्र से बकाया फंड जारी करने की अपील
- 10. भविष्य की रणनीति और विरोध की रूपरेखा
👷 1. मनरेगा (MGNREGA) का पुन: क्रियान्वयन
सिद्धारमैया ने केंद्र से मांग की है कि मनरेगा को उसके मूल भावना के साथ लागू किया जाए। उन्होंने बजट में कटौती और नियमों में बदलाव को गरीब विरोधी करार दिया है।
🚫 2. VB-GRAM-G को समाप्त करने की मांग
मुख्यमंत्री ने केंद्र द्वारा प्रस्तावित या लागू किए गए प्रशासनिक ढांचे, जिसे VB-GRAM-G के रूप में संदर्भित किया जा रहा है, को समाप्त करने की मांग की है। उनका मानना है कि यह राज्यों के संघीय ढांचे के खिलाफ है।
📅 3. 150 कार्य दिवसों की मांग
ग्रामीण संकट को देखते हुए, कर्नाटक सरकार चाहती है कि साल में 100 दिनों के बजाय कम से कम 150 दिनों का सुनिश्चित रोजगार दिया जाए, विशेषकर सूखा प्रभावित क्षेत्रों में।
💰 4. मजदूरी भुगतान में देरी
सिद्धारमैया ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार समय पर मजदूरी का हिस्सा जारी नहीं कर रही है, जिससे ग्रामीण मजदूर भुखमरी की कगार पर हैं।
🏦 5. वित्तीय स्वायत्तता का सवाल
मुख्यमंत्री के अनुसार, केंद्र सरकार राज्यों के राजस्व और खर्च करने के तरीकों पर नियंत्रण करने की कोशिश कर रही है, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।
🌵 6. सूखे की स्थिति और राहत
कर्नाटक के कई जिले सूखे की मार झेल रहे हैं। सिद्धारमैया ने कहा कि ऐसे समय में केंद्र को मदद का हाथ बढ़ाना चाहिए न कि योजनाओं को और जटिल बनाना चाहिए।
🏢 7. केंद्रीकरण का विरोध
सीएम ने स्पष्ट किया कि दिल्ली से बैठकर गाँवों का प्रशासन नहीं चलाया जा सकता। उन्होंने स्थानीय निकायों को मजबूत करने पर जोर दिया।
🏛️ 8. ग्राम पंचायतों का सशक्तिकरण
उन्होंने मांग की कि पंचायतों को सीधे फंड मिलना चाहिए और उनके काम में तकनीकी अड़चनें पैदा नहीं करनी चाहिए।
📑 9. बकाया फंड की मांग
कर्नाटक सरकार का दावा है कि केंद्र पर राज्य का हजारों करोड़ रुपये का बकाया है, जो मनरेगा और अन्य विकास कार्यों के लिए जरूरी है।
🔮 10. भविष्य का राजनीतिक रुख
सिद्धारमैया ने चेतावनी दी है कि यदि इन मांगों को नहीं माना गया, तो राज्य सरकार बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेगी और अन्य समान विचारधारा वाले राज्यों को भी साथ लाएगी।
📌 कर्नाटक सरकार की मुख्य मांगें
| मुद्दा (Issue) | कर्नाटक सरकार का रुख (Stance) |
|---|---|
| मनरेगा (MGNREGA) | पुराना ढांचा और 150 दिन काम |
| प्रशासनिक ढांचा | VB-GRAM-G का खात्मा |
| मजदूरी (Wages) | बिना देरी तुरंत भुगतान |
| पंचायत अधिकार | पूर्ण विकेंद्रीकरण |
⚠️ Disclaimer: यह लेख मुख्यमंत्री सिद्धारमैया द्वारा दिए गए सार्वजनिक बयानों और कर्नाटक सरकार की आधिकारिक मांगों पर आधारित है।

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