बिहार में जमीन परिमार्जन का कड़वा सच: 99% आवेदन हो रहे रिजेक्ट, बिना 'सुविधा शुल्क' के सुधार मुमकिन नहीं?
🚨 बिहार में जमीन परिमार्जन का कड़वा सच: 99% आवेदन हो रहे रिजेक्ट, बिना 'सुविधा शुल्क' के सुधार मुमकिन नहीं?
Ground Report: पोर्टल पर 'डिजिटल' सुधार का दावा, जमीन पर 'दलालों' का कब्जा
पटना: बिहार सरकार ने जमीन के डिजिटल रिकॉर्ड को सुधारने के लिए परिमार्जन पोर्टल तो बना दिया, लेकिन किसानों के लिए यह 'आफत' बन गया है। आरोप है कि अंचल कार्यालयों (Block Offices) में बिना पैसे के एक भी परिमार्जन नहीं होता। आंकड़े गवाह हैं कि लगभग 99% आवेदनों को तकनीकी खामियों का बहाना बनाकर रिजेक्ट कर दिया जाता है, जिससे किसान दलालों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
- 1. रिजेक्शन की 99% स्ट्राइक रेट का रहस्य
- 2. बिना 'सुविधा शुल्क' के काम नहीं होने का आरोप
- 3. अंचल अधिकारियों (CEO) और कर्मचारियों की मनमानी
- 4. किसानों को चक्कर कटवाने का नया हथियार: 'Remark'
- 5. RTPS काउंटर से लेकर राजस्व कार्यालय तक भ्रष्टाचार
- 6. परिमार्जन पोर्टल की तकनीकी पेचीदगियां
- 7. दलालों और राजस्व कर्मचारियों का 'नेक्सस'
- 8. सालों से लंबित पड़े लाखों आवेदन
- 9. परिमार्जन प्लस पोर्टल: नई बोतल में पुरानी शराब?
- 10. क्या है समाधान? कैसे बचें भ्रष्टाचार से
📊 1. रिजेक्शन की 99% स्ट्राइक रेट का रहस्य
बिहार के अंचलों में यह आम बात हो गई है कि आप चाहे कितने भी सही दस्तावेज अपलोड कर दें, आपका आवेदन रिजेक्ट होना तय है। रिजेक्शन का दर इतना ऊंचा है कि आम आदमी का ऑनलाइन सिस्टम से भरोसा उठ गया है।
💸 2. बिना 'सुविधा शुल्क' के काम नहीं होने का आरोप
सोशल मीडिया और जमीनी स्तर पर किसान खुलेआम आरोप लगा रहे हैं कि जब तक राजस्व कर्मचारी (Halka Karamchari) को "खुश" नहीं किया जाता, तब तक फाइल आगे नहीं बढ़ती।
👮 3. अंचल अधिकारियों (CEO) और कर्मचारियों की मनमानी
अंचल अधिकारी अक्सर आवेदनों पर ध्यान नहीं देते। कर्मचारियों के रिपोर्ट लगाने के बाद ही वे हस्ताक्षर करते हैं, जिससे भ्रष्टाचार की चेन और मजबूत हो जाती है।
📝 4. किसानों को चक्कर कटवाने का नया हथियार: 'Remark'
आवेदन रिजेक्ट करते समय अक्सर अस्पष्ट 'Remark' लिखा जाता है, जैसे "दस्तावेज अपूर्ण है" या "मिलान नहीं हुआ"। यह जानबूझकर किया जाता है ताकि किसान अंचल कार्यालय आकर दलालों से संपर्क करे।
🏢 5. RTPS काउंटर से लेकर राजस्व कार्यालय तक भ्रष्टाचार
ऑनलाइन आवेदन करने के बाद भी हार्ड कॉपी जमा करने के नाम पर किसानों को दौड़ाया जाता है, जो पूरी तरह से गैर-कानूनी है।
💻 6. परिमार्जन पोर्टल की तकनीकी पेचीदगियां
पोर्टल का सर्वर अक्सर धीमा रहता है और दस्तावेज अपलोड करने की सीमा इतनी कम है कि साफ फोटो अपलोड करना मुश्किल हो जाता है, जिसे रिजेक्शन का बहाना बनाया जाता है।
🤝 7. दलालों और राजस्व कर्मचारियों का 'नेक्सस'
हर ब्लॉक के बाहर दलालों की फौज खड़ी रहती है जो "गारंटी के साथ परिमार्जन" कराने का दावा करती है। यह बिना सरकारी मिलीभगत के संभव नहीं है।
📅 8. सालों से लंबित पड़े लाखों आवेदन
कई किसानों के आवेदन 2-3 साल से "Pending" स्टेटस में हैं। समय सीमा (SLA) का पालन केवल कागजों पर हो रहा है।
🆕 9. परिमार्जन प्लस पोर्टल: क्या कुछ बदलेगा?
सरकार ने अब 'परिमार्जन प्लस' लॉन्च किया है, लेकिन किसानों का कहना है कि जब तक काम करने वाले कर्मचारी नहीं बदलेंगे, केवल पोर्टल बदलने से कुछ नहीं होगा।
💡 10. क्या है समाधान? कैसे बचें भ्रष्टाचार से
भ्रष्टाचार से बचने के लिए किसान उच्च अधिकारियों (जैसे DCLR या DM) के पास लिखित शिकायत करें और आवेदन का रसीद नंबर संभाल कर रखें। जनसुनवाई में अपनी बात पुरजोर तरीके से उठाएं।
📌 परिमार्जन की 'जमीनी' हकीकत
| दावा (Government Claim) | हकीकत (Ground Reality) |
|---|---|
| मुफ्त ऑनलाइन सेवा | अघोषित 'सुविधा शुल्क' की मांग |
| 30 दिनों में समाधान | सालों तक चक्कर काटना |
| पारदर्शी व्यवस्था | 99% आवेदन बेवजह रिजेक्ट |
| बिचौलियों का अंत | दलालों के बिना काम नामुमकिन |
⚠️ Disclaimer: यह लेख किसानों की शिकायतों, मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों पर आधारित है। आधिकारिक स्पष्टीकरण के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार से संपर्क करें।

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